कुछ करने की कोई वजह नहीं है
सोचने को कुछ बचा नहीं है
एक कोने में खाली जूते पड़े है
दीवारो पर टकटकी लगाये आँखें थक चुकी है
सोये हुए हाथ लटककर ज़मीन की ओर इशारा करते है
उंगलियो से आँखें मसलता हूँ तो कुर्सी शोर करती है
बस कभी कभी कुछ गा लेता हूँ
एड़ी ज़मीन पर रख कर पैर हिला लेता हूँ
बिना कुछ सोचे बिना कुछ समझे
वो बात ही अलग होती है
सोचने को कुछ बचा नहीं है
एक कोने में खाली जूते पड़े है
दीवारो पर टकटकी लगाये आँखें थक चुकी है
सोये हुए हाथ लटककर ज़मीन की ओर इशारा करते है
उंगलियो से आँखें मसलता हूँ तो कुर्सी शोर करती है
बस कभी कभी कुछ गा लेता हूँ
एड़ी ज़मीन पर रख कर पैर हिला लेता हूँ
बिना कुछ सोचे बिना कुछ समझे
वो बात ही अलग होती है