24/09/2010

कुछ देर और है
दिन तो बुझने दो
फिर चलेंगे सैर पर
जब दूर दूर
तैरेगा अंधेरा
खुली होँगी सड़के
रास्ते होँगे आवारा
एक अजीब सी आज़ादी
चलेगी साथ

कुछ देर और है
हलचल संभलने दो
फिर करेंगे बातें
जब हवा होगी शांत
मीलो दूर से आयेगी
टप टप बूँदो की आवाज़
ये पत्थर ये कुर्सियाँ
ये सड़के ये गलियाँ
करेंगी मुझसे बात

कुछ देर और है
कुछ सोचना
समझना होगा बस
समय को रुला कर
खुद पर हसना होगा बस
ज़िंदगी काटने नहीं
जीने आये है
बैठे बैठे ये अंधेरा
पीने आये है

कुछ देर और है
फिर करेंगे बातें
फिर चलेंगे सैर पर