तुम कुछ भी बोल देते हो
सब जायज़ है
फिर मेरा ना बोलना
जायज़ क्यों नहीं
04/09/2014
लत को लत कहने की लत लगी है
खुशी से खुश हो
नाराज़गी से नाराज़
ज़िद पकड़कर ज़िद करते हो
माफ़ी लेकर माफ़
19/05/2014
मकसद कुछ नही होता
बहाना होता है
फिर चाहे येही बहाना बना लो कि यह बहाना नही मकसद है
12/01/2014
बस आँखें जगी हैं
थोड़ा मन भी जगा है
कहाँ जाऊँगा
हाँ में हाँ ढूँडने
हाँ ना का सवाल नहीं है
सवाल है कि मन का क्या होगा
मन यूही बहल जाएगा
और आँखें भी थक कर बंद हो जाएंगी
29/07/2013
किसे क्या समझाऊ
ज़रुरत नहीं है अभी तो
ज़रुरत होगी तो समझ आएगा
फिर भी न आए
तो ज़रुरत क्या थी
बस येही के दो बात आगे बढ़ जाए
और एक नई ज़रुरत बनाने का बहाना मिल जाए
ज़रुरत की ज़रुरत नहीं है
पर ज़रुरत ज़रूरी ज़रूर है
15/04/2013
ख़ास लोग बहुत ख़ास लोग बहुत बहुत बहुत ख़ास लोग ख़ास लोग ख़ास होना खासियत है और खासियत कुछ ख़ास नहीं है ख़ास लोग
06/12/2012
जहाँ बस नहीं चलता
वहाँ कौन ले आता है
और कहाँ जाऊंगा
यहाँ भी तो बस नहीं चलता
तो घूम आते है