09/12/2010

खाली पड़े आसमान को देखता हूँ
दूर दूर कोई लहराव नहीं है
बस हलकी हलकी गर्माहट चेहरे को छूती है
फिर ज़मीन से घास तोड़ता हूँ
तोड़ मरोड़ के उसे इधर उधर फ़ेंक देता हूँ
कोई वजह नहीं होती
पर अच्छा लगता है
सब कुछ कितना खाली है
जीना न मरना ही तो है
बोलना बस चुप्पी तोड़ना ही तो है
बस सुने सुनाए मतलब है
बेमतलब की बातो में भी मतलब निकल आता है
जो मज़ा हज़ारो सिमटे सुर नहीं दे पाते
बिखरे शोर से वो मज़ा मिल जाता है
हर मामूली सी चीज़ में कुछ ख़ास नज़र आता है
कितनी कोशिश करके जो नहीं मिलता
घर बैठे वो पास चला आता है
इतनी अलग
इतनी अच्छी
इतनी अजीब
इतनी कच्ची
वो बात ही अलग होती है