किसे क्या समझाऊ
ज़रुरत नहीं है अभी तो
ज़रुरत होगी तो समझ आएगा
फिर भी न आए
तो ज़रुरत क्या थी
बस येही के दो बात आगे बढ़ जाए
और एक नई ज़रुरत बनाने का बहाना मिल जाए
ज़रुरत की ज़रुरत नहीं है
पर ज़रुरत ज़रूरी ज़रूर है
ज़रुरत नहीं है अभी तो
ज़रुरत होगी तो समझ आएगा
फिर भी न आए
तो ज़रुरत क्या थी
बस येही के दो बात आगे बढ़ जाए
और एक नई ज़रुरत बनाने का बहाना मिल जाए
ज़रुरत की ज़रुरत नहीं है
पर ज़रुरत ज़रूरी ज़रूर है